आंखों के विभिन्न रोग के कारण और घरेलू उपचार
यदि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आंखों का ठीक प्रकार से ना ध्यान रखा जाए तो आंखों में भी कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावना रहती है आंखों की कुछ बीमारियां हैं जो उम्र के साथ-साथ बढ़ती हैं लेकिन कुछ बीमारियां हैं जो अनियमित दिनचर्या दूषित खानपान की वजह से हो जाती है
आंखों के रोग क्या है
आंख के रोगों का उपचार
आंख के रोग मोतियाबिंद गुहेरी रोहे और रतौंधी
मोतियाबिंद, रोहे, गुहेरी,का घरेलू इलाज eye care
आंखों में कई प्रकार की बीमारियां पाई जाती है जैसे आंखों में दर्द, सूजन और जलन, मोतियाबिंद, गुहेरी, कमजोर दृष्टि, रतौंधी, रोहे आदि लोग शामिल है।
१. मोतियाबिंद
मोतियाबिंद के लक्षण (motiyabind ke lakshan in hindi)
मोतियाबिंद में आंखों की पुतली पर सफेदी आ जाती है। और रोगी की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है। वह किसी चीज को स्पष्ट नहीं देख पाता। आंखों के आगे धब्बे और फिर काले बिंदु से दिखाई पड़ने लगते हैं। जैसे -जैसे रोग बढ़ता जाता है रोगी ठीक से देखने में असमर्थ हो जाता हैै अगर समय सेे इसका इलाज न किया जाए तो रोगी पूर्ण रूप सेे आंखों की रोशनी खो सकता है
मोतियाबिंद प्रायः ५0 वर्ष की उम्र के बाद वृद्धावस्था के कारण होता है। इसके अतिरिक्त या अत्यधिक पढ़ने लिखने, रात में पढ़ने, अधिक शराब, तंबाकू धूम्रपान, चीनी, चाय- कॉफी, गलत खान-पान तथा पौष्टिक भोजन के अभाव के फल स्वरुप भी हो सकता है तो चलो हम जानते हैं मोतियाबिंद खत्म करने की घरेलू देसी दवा क्या है।
मोतियाबिंद निवारण के लिए निम्नलिखित उपचार करें –
मोतियाबिंद का देसी इलाज और मोतियाबिंद खत्म करने की दवा
१. लहसुन की चार कलियां छीलकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह जलपान से पूर्व इन कलियों को खाकर ऊपर से वह पानी पी लेने से मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।
२. गाजर का रस एक गिलास सुबह तथा एक गिलास शाम को पीने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
३. एक बड़ा चम्मच सूखा धनिया, इतनी ही मात्रा में सौफ और एक छोटा चम्मच खांड (देसी शक्कर) मिलाकर पीस लें। दोनों समय यह खुराक शुद्ध जल के साथ सेवन करने से मोतियाबिंद नहीं होता।
४. शुद्ध शहद सुबह-शाम आंखों में दो-दो बूंद डालने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
प्याज को पीस और निचोड़ कर उसका रस निकाल ले। उससे दुगनी मात्रा में उसमें शहद मिलाएं। इसे नित्य आंखों में लगाएं। यदि यह आंखों में अधिक लगे तो उतनी ही मात्रा में गुलाबजल मिला लें। इससे मोतियाबिंद की संभावना नहीं होता।
२. रोहे
रोहे नेत्र का सबसे हानिकारक रोग है। प्रारंभ में इसका कुछ पता नहीं चलता छोटे-बड़े लोगों को नेत्रहीन बना देता है। इस रोग का प्रारंभ आंखें दुखने के साथ होता है।
आंखें लाल हो जाती हैं और इससे पीब निकलने लगता है। आंखें साफ ना करने से पीब आंखो के पास लगी रहती है और जीवाणुओं के संक्रमण से रोग अधिक बढ़ जाता है। इसके फलस्वरूप आंखों में बहुत अधिक शोथ हो जाता है। साथ ही पलकों में भीतर की ओर दाने निकल आते हैं।
रोहे ( पोथकी ) एक संक्रमण रोग है। जोकि घर में किसी एक सदस्य को हो जाने पर दूसरे स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। शुरुआत में इसे लोग आंख दुखना ही समझते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद पलकों में शोथ हो जाता है। फिर छोटे-छोटे दाने पलकों पर उभर आते हैं जिसके कारण आंखों के खोलने में बहुत कष्ट होता है।
रोहे का पता चलते ही निम्नलिखित घरेलू उपचार करना चाहिए –
१. आंवले के स्वरस को जल में मिलाकर नेत्र साफ करने से गंदगी दूर होती है और रोहे ठीक हो जाते हैं।
२. रात्रि को त्रिफला (हरड, बहेड़ा और आंवला) पानी में भिगोकर रख दें। प्रातः काल उठने पर कपड़े से छानकर उस जल से नेत्रों को साफ करें। इससे नेत्रों की गंदगी नष्ट होती है। रोहे समाप्त होकर नेत्र- ज्योति तीव्र होती है
३. सहजन के पत्ते के रस में शहद और सेंधा नमक मिलाकर नेत्रों में लगाने से सोच लालिमा नष्ट होती है और रोहित ठीक हो जाते हैं
४. मिश्री के कपड़े से छान कर स्त्री के दूध में घोलकर आंखों में डालें। रोहे शीघ्र ही ठीक हो जाएंगे
३. गुहेरी
आंखों में गुहेरी होने पर निम्नलिखित उपचार करना चाहिए
१. अरहर की दाल को पानी के साथ घिसकर लगाने से गुहेरी ठीक हो जाती है।
२. छोटी हरड़ को गुलाब जल में घिसकर लेप लगाने से गुहेरी की सूजन और दर्द शीघ्र मिट जाती है।
३. रसोद घिसकर लगाने से आंखों की गुहेरी जल्दी ठीक हो जाती है।
जरूरी सूचना: हमारी वेबसाइट स्वास्थ्य संबंधी उपयोगी जानकारी प्रदान करती है परंतु ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। बताया गया यह उपचार सामान्य प्रकार के अवस्था में प्रयोग किया जा सकता है यदि समस्या गंभीर है तो किसी योग्य नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें तथा उसके परामर्श के अनुसार दवा ले
धन्यवाद
अशोक तिवारी