महिलाओं में सफेद पानी आना और पेट में दर्द होना का रामबाण घरेलू उपचार
महिलाओं में सफेद पानी आना और पेट में दर्द होना एक आम समस्या हैं महिलाओं में सफेद पानी आना और पेट में दर्द होना (श्वेत प्रदर) या ल्योकोरिया महिलाओं में होने वाली एक सामान्य बीमारी बन गईं है जो हार्मोनल परिवर्तन योनि संक्रमण और कुछ दवाओं के सेवन के कारण भी हो सकता है यह स्राव मासिक धर्म का समय से पहले या समय से बाद का कारण भी हो सकता है।
इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं को काफी परेेेशानी झेलनी पड़ती है। यह रोग रोगणी के शरीर को दुर्बल एवं कान्ति हीन बना देता है। और यदि खान-पान को ध्यान में रखते हुए कुछ घरेलू उपायो को इस्तेमाल करके सफेद पानी और कमर दर्द इस बीमारी से पूर्णतया निजात पाया जा सकता है
अब प्रश्न उठता है कि सफेद पानी के लक्षण क्या है ?
सफेद पानी के लक्षण
सफेद पानी आने के लक्षण निम्नलिखित हैं – महिलाओं में सफेद पानी आना और पेट में दर्द होना
१. सफेद रंग का स्राव- श्वेत प्रदर की बीमारी में की योनि से पतला या गाढ़ा सफेद या गंदे रंग का या चिकना स्राव कम या अधिक मात्रा में निकलता हैैं।
२. खुजली- सफेद पानी के आने के साथ योनि क्षेत्र में खुजली और त्वचा में लाल चकत्ते व दाग दिख सकते
३. जलन- कुछ महिलाओं में सफेद पानी आने के कारण योनि में जलन और दर्द की समस्या हो सकती है
४. सुगंध- कई बार देखने को मिलता है कि सफेद पानी आने के साथ उसमें एक विशेष सुगंध की अनुभूति होती है जो कीटाणुओं के इंफेक्शन के कारण होता है
यदि आपको योनि से सफेद रंग के स्राव, खुजली, जलन, सुगंध, और सूजन, आदि की समस्या हो रही है तो यह श्वेत प्रदर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं
श्वेतप्रदर के नुकसान
अब प्रश्न उठता है कि सफेद पानी आना और पेट में दर्द होना से क्या नुकसान होता है तो चलो जानते है कि सफेद पानी आने से क्या नुकसान है :-
१. इस रोग से स्त्री का शरीर कमजोर होता चला जाता है।
२. आंखें अंदर को धंसती जाती हैं।
३. सिर तथा कमर में दर्द रहता है।
४. बदन टूटता रहता है।
५. मुंह का स्वाद खराब खराब सा रहता है।
६. रोगिणी थोड़ा-सा काम करके ही थक जाती है।
७. रोग की बढ़ी हुई दशा में कभी-कभी मूर्च्छा भी आ जाती है।
सफेद पानी का रामबाण घरेलू उपचार
सफेद पानी का रामबाण इलाज निम्नलिखित हैं —
तुलसी शहद और जीरा से श्वेतप्रदर का ईलाज
१. तुलसी के रस में शहद मिलाकर सुबह–शाम चाटने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है। यह श्वेत प्रदर की रामबाण दवा है।
२. तुलसी–रस में जीरा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से भी श्वेत प्रदर से मुक्ति मिल जाती है।
आंवला शहद और केला से श्वेतप्रदर का ईलाज
३. स्त्रियों को जब अपने यौनांगों में जलन हो तो आंवले के रस में, शहद मिलाकर सेवन करना चाहिए। इससे श्वेत प्रदर में लाभ होता है।
४. रात सोते समय आंवले का चूर्ण लें।
५. दो पके केले खाकर ऊपर से दूध में शहद मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर रोग में शीघ्र लाभ होता है।
६. दूध में पके केले की खीर बनाकर रोज खाने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है
७. पके केले का गूदा, आंवले का रस और शक्कर मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर तत्काल नष्ट हो जाता है।
८. एक पका केला एक छोटे चम्मच घी के साथ सुबह-शाम खाने से दस-पंद्रह दिनों में ही श्वेत प्रदर खत्म हो जाता है।
९. एक चमच शहद, दो पके केले के साथ लें। ऊपर से एक छोटी इलायची खा लें।
१०. केले के वृक्ष के कोमल पत्तों को चटनी की तरह पीसकर छान लें और उसे दूध मिलाकर खीर की तरह पकाकर खाएं। श्वेत प्रदर में लाभ होगा।
श्वेत प्रदर में भी लाभप्रद है सिंघाड़ा
११. दो सूखे सिंघाड़े शाम को पानी के मटके में डाल दें। सुबह उसे मटके में से निकालकर कूट–पीस लें और बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। सुबह खाली पेट खाकर ऊपर से गाय का मीठा दूध पी लें। खटाई, तेल,
लाल मिर्च और तले पदार्थ न खाएं। श्वेत प्रदर ठीक हो जाएगा।
१२. सिंघाड़े के आटे का हलुआ नित्य प्रातः खाने से आराम मिलता है। इसका प्रयोग एक माह तक करें।
१३. सिंघाड़े का आटा, असगन्ध का चूर्ण और लोध बराबर मात्रा में आवश्यकता के अनुसार एक सप्ताह के लिए शीशी में बंद करके रख लें। नित्य जलपान से पूर्व और रात में खाने के बाद एक छोटा चम्मचभर यह चूर्ण हल्के गर्म दूध के साथ लें।
गिलोय और सतावर से श्वेतप्रदर का ईलाज का ईलाज
१४. गिलोय और सतावर के टुकड़े का समभाग लेकर, मोटा कूटकर दो कप पानी में डालकर काढ़ा बना लें। जब पानी आधा कप रह जाए तो उसे उतार लें। आधा काढ़ा सुबह और आधा शाम को पी लें। लगातार कुछ दिनों तक सेवन करने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाएगा।
१५. बताशा और बरगद के दूध से श्वेतप्रदर का ईलाज का ईलाज
१६. श्वेत प्रदर की शिकायत होने पर, एक बताशे में सूर्योदय से पहले, बड़ के पत्तों का दूध छः–सात बूंदें टपकाकर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से, पुराने से पुराना श्वेत प्रदर दूर हो जाता है।
सफेद पानी (श्वेत प्रदर) की आयुर्वेदिक दवा
आयुर्वेद के अनुसार
* सुबह-शाम चन्द्रप्रभावटी नामक एक-एक गोली पानी के साथ लें।
* अश्वगंधारिष्ट तथा अशोकारिष्ट को एक-एक चम्मच मिलाकर भोजन के बाद सेवन करें।
कब्ज होने की स्थिति में नित्य त्रिफला का सेवन करें।
श्वेत प्रदर के रोगी को घरेलू उपचार के दौरान इन चीजों का परहेज करना चाहिए –
* सभी प्रकार का गरिष्ठ भोजन
* मांस अंडा
* खटाई, तेल, लाल मिर्च और तले पदार्थ अधिक मसालों न खाएं तथा चाट- पकौड़े आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए।
* खोया और उससे बनी मिठाइयों का परहेज करें।
भोजन में :
* सादा भोजन लें।
* मसूर की दाल, कुलथी, जीरा और सोंठ आदि को भोजन में उचित स्थान दें।
फल और सब्जी में :
* अंगूर, केला, फालसा।
* टमाटर, चुकन्दर लें साथ ही साथ नित्य प्रातः काल हल्का व्यायाम करें।
उपरोक्त बताऐ गये उपचार के साथ – साथ यह भी ध्यान रहे कि उपचार की अवधि में रोगिणी को
कामोत्तेजक साहित्य, कामोत्तेजक फिल्म, और कामोत्तेजक वार्ता आदि से दूर रहें। इसके अलावा चिन्ता, भय, शोक आदि के विचार और भावों से दूर रहें।
आस्वीकरण : यह वेबसाइट स्वास्थ्य संबंधी उपयोगी जानकारी प्रदान करती है परंतु ये जानकारी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। बताया गया यह उपचार सामान्य प्रकार के अवस्था में प्रयोग किया जा सकता है यदि समस्या गंभीर है तो किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें तथा उसके परामर्श के अनुसार दवा ले
धन्यवाद